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मेरे दिल की बात

मेरा पूर्ण विश्वास है की हम जो भी परमपिता परमेश्वर से मन से मागते है हमें मिलता है जो नहीं मिलता यां तो हमारे मागने में कमी है यां फिर वह हमारे लिए आवश्यक नहींहै क्योकि वह (प्रभु ) हमारी जरूरतों को हम से बेहतर जनता है फिर सौ की एक बात जो देने की क्षमता रखता है वह जानने की क्षमता भी रखता है मलकीत सिंह जीत>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> ................ मेरे बारे में कुछ ख़ास नहीं संपादक :- एक प्रयास ,मासिक पत्रिका पेशे से :-एक फोटो ग्राफर , माताश्री:- मंजीत कौर एक कुशल गृहणी , पिताश्री :-सुरेन्द्र सिंह एक जिम्मेदार पिता व् जनप्रतिनिधि (ग्राम प्रधान1984 -1994 /2004 - अभी कार्यकाल जारी है http://jeetrohann.jagranjunction.com/

बुधवार, 26 अक्तूबर 2011

दिये का साक्षात्कार


दिए का साक्षात्कार

 मैंने पूंछा
 ए दिये
 क्या  करते हो  तुम रौशनी
 निश्कपट, निस्वार्थ
 दिया बोला "हाँ " मगर
 नहीं जलाते अब लोग मुझे
 निशकपट ,निस्वार्थ
मैंने कहा ,तुम भी तो नहीं जलते
अब बिना धुंआ किये ?
रो दिया वो "दिया"
नहीं देता मुझे तेली शुद्ध तेल
न बाती ,न शुद्ध मन ,
जो मै जल सकूँ   बिना धुएं के
दे सकूँ वो रौशनी जो करे दिलों को रौशन
पी लूँ जहर मिला तेल भी
निगल जाऊं हलक में रस्सी समझ बाती मगर
किर तरह जलूं ,बिन भावना ,बिन प्रेम
कैसे मिटा सकूँ  अँधेरे  अपने औ तुम्हारे
इस तरह  मैं "दिया"

मलकीत सिंह "जीत"

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब .....
    कुछ अलग हट के अच्छी लगी रचना .....

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  2. बहुत बढ़िया प्रस्तुति...बधाई

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  3. सुंदर रचना बेहतरीन अभिव्यक्ति ,.....
    नया साल "2012" सुखद एवं मंगलमय हो,....

    मेरी नई पोस्ट --"नये साल की खुशी मनाएं"--

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