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मेरे दिल की बात

मेरा पूर्ण विश्वास है की हम जो भी परमपिता परमेश्वर से मन से मागते है हमें मिलता है जो नहीं मिलता यां तो हमारे मागने में कमी है यां फिर वह हमारे लिए आवश्यक नहींहै क्योकि वह (प्रभु ) हमारी जरूरतों को हम से बेहतर जनता है फिर सौ की एक बात जो देने की क्षमता रखता है वह जानने की क्षमता भी रखता है मलकीत सिंह जीत>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> ................ मेरे बारे में कुछ ख़ास नहीं संपादक :- एक प्रयास ,मासिक पत्रिका पेशे से :-एक फोटो ग्राफर , माताश्री:- मंजीत कौर एक कुशल गृहणी , पिताश्री :-सुरेन्द्र सिंह एक जिम्मेदार पिता व् जनप्रतिनिधि (ग्राम प्रधान1984 -1994 /2004 - अभी कार्यकाल जारी है http://jeetrohann.jagranjunction.com/

बुधवार, 6 नवंबर 2013

बबासीर के मस्सों को कैसे नष्ट करें

बबासीर के मस्सों को कैसे नष्ट करें
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1- नीम के कोमल पत्तियों को घी में भूनकर उसमें थोड़े-से कपूर डालकर टिकिया बना लें। टिकियों को गुदाद्वार पर बांधने से मस्से नष्ट होते हैं।

2- आधा चम्मच हर्र का चूर्ण गर्म पानी से सुबह-शाम खाने से बादी बवासीर बन्द हो जाती है।

3-नीम के कोमल पत्तियों को घी में भूनकर उसमें थोड़े-से कपूर डालकर टिकिया बना लें। टिकियों को गुदाद्वार पर बांधने से मस्से नष्ट होते हैं।

4- छोटी मक्खी को शहद और गाय का घी बराबर मात्रा में लेकर मस्सों पर लगायें। इस मिश्रण को बवासीर के मस्सों पर लगाने से कुछ सप्ताह में ही मस्से सूखकर गिर जाते हैं।

5-थूहर के दूध में हल्दी का बारीक चूर्ण मिलाकर उसमें सूत का धागा भिगोकर छाया में सुखा लें। इस धागे से मस्सों को बांधें, मस्से को धागे से बांधने पर 4-5 दिन तक खून निकलता है तथा बाद में मस्से सूख कर गिर जाते हैं। ध्यान रहे- इसका प्रयोग कमजोर रोगी पर न करें।

6- नीलाथोथा 20 ग्राम और अफीम 40 ग्राम लेकर इसे महीन कूट लें। इस चूर्ण को 40 ग्राम सरसों के तेल में मिलाकर पकायें। प्रतिदिन सुबह-शाम उस मिश्रण (पेस्ट) को रूई से मस्सों पर लगाने से मस्से 8 से 10 दिनों में ही सूखकर गिर जाते हैं।

7- मदार का दूध और हल्दी को पीसकर मस्सों पर रखकर लगोट बांधें। इसको लगाने से मस्से सूखकर ठीक हो जाते हैं।

8- कालीमिर्च और स्याहजीरा (काला जीरा) को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनायें। यह चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक होता है तथा बवासीर के मस्से भी ठीक होते हैं।

9- कालीमिर्च 3 ग्राम, पीपल 5 ग्राम, सौंठ 10 ग्राम तथा जिमीकन्द 20 ग्राम को सूखाकर महीन चूर्ण बना लें। उस चूर्ण में 200 ग्राम गुड़ डालकर अच्छी तरह मिला लें। इससे बेर के बराबर गोलियां बनाकर 1-1 गोली दूध या जल के साथ प्रतिदिन दो बार पीने से खूनी तथा बादी दोनों बवासीर ठीक होती है।

10- लौकी के पत्तों को पीसकर बवासीर के मस्सों पर बांधने से कुछ ही दिनों में लाभ दिखना शुरू हो जाता है।

11- लौकी या तुलसी के पत्तों को जल के साथ पीसकर अर्श (बवासीर) के मस्से पर दिन में दो से तीन बार लगाने से पीड़ा व जलन कम होती है तथा मस्से भी नष्ट होते है।

12- नीम की निबौली, कलमीशोरा, रसौत और हरड़ 10-10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर, बारीककर मूली के रस में घोटकर जंगली बेर के बराबर गोलियां बना लें। सुबह-शाम एक-एक गोली ताजे पानी या मट्ठा के साथ खाने से खूनी बवासीर से खून आना पहले ही दिन बन्द हो जाता है और बादी बवासीर एक महीने के प्रयोग से पूरी तरह नष्ट हो जाती है।

13- मूली के रस में नीम की निबौली की गिरी पीसकर कपूर मिलाकर मस्सों पर लेप करने से मस्से सूख जाते हैं।

14- सूखे आंवलों का चूर्ण 20 ग्राम लेकर 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रातभर भिगोकर रखें। दूसरे दिन सुबह उसे हाथों से मलकर छान लें तथा छने हुए पानी में 5 ग्राम चिरचिटा की जड़ का चूर्ण और 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पीयें। इसको पीने से बवासीर कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं और मस्से सूखकर गिर जाते हैं।

15- करेले के बीजों को सूखाकर इसका महीन पाउडर बनाकर इसे कपड़े से छान लें। इसके पाउडर में थोड़ी-सी शहद तथा सिरका मिलाकर मलहम बना लें। इस मलहम को लगातार 20 दिन तक मस्सों पर लगाने से मस्से सूख जाते हैं, तथा बवासीर (अर्श) रोग ठीक हो जाता है।

16- बवासीर के मस्सों को दूर करने के लिए 2 प्याज को भूमल (धीमी आग या राख की आग) में सेंककर छिलका उताकर लुगदी बनाकर मस्सों पर बांधने से मस्से तुरन्त नष्ट हो जाते हैं।

17- चाय की पत्तियों को पीसकर मलहम बना लें और इसे गर्म करके मस्सों पर लगायें। इस मलहम को लगाने से मस्से सूखकर गिरने लगते हैं।

18- लगभग 60 ग्राम काले तिल खाकर ऊपर से ठंड़ा पानी पीने से बिना खून वाली बवासीर (वादी बवासीर) ठीक हो जाती है। दही के साथ पीने से खूनी बवासीर भी नष्ट हो जाती है।

19- मेंहदीं के पत्तों को जल के साथ पीसकर गुदाद्वार पर लगाकर लंगोट बांधे। इससे मस्से सूख कर गिर जाते हैं।

20- बैंगन को जला लें। इनकी राख शहद में मिलाकर मरहम बना लें। इसे मस्सों पर लगायें। मस्से सूखकर गिर जायेंगें।

21- हरसिंगार के बीजों को छील लें। 10 ग्राम बीज में 3 ग्राम कालीमिर्च मिलाकर पीसकर गुदा पर लगाने से बादी बवासीर ठीक होती है।

22- छोटी हरड़, पीपल और सहजने की छाल का चूर्ण बनाकर उसी मात्रा में मिश्री मिलाकर खायें। इससे बादी बवासीर ठीक होती है।

23- सांप की केंचुली को जलाकर उसे सरसों के तेल में मिलायें। इस तेल को गुदा पर लगाने से मस्से कटकर गिर जाते हैं।

24- कपूर को आठ गुना अरण्डी के गर्म तेल में मिलाकर मलहम बनाकर रखें। पैखाने के बाद मस्सों को धोकर और पौंछकर मस्सों पर मलहम को लगायें। इसको लगाने से दर्द, जलन, चुभन आदि में आराम रहता है तथा मस्से सूखकर गिर जाते हैं।

25- फूली हुई और दर्दनाक बवासीर पर हरी या सूखी भांग 10 ग्राम अलसी, 30 ग्राम की पुल्टिश बनाकर बांधने से दर्द और खुजली मिट जाती है।

26- तुलसी के पत्ते का रस निकालकर इसे नीम के तेल में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मस्सों पर लगाएं। मस्सों पर इसको लगाने से मस्से जल्द ठीक हो जाते हैं।

27- चुकन्दर खाने व रस पीते रहने से बवासीर के मस्से समाप्त हो जाते हैं।

28- बवासीर के मस्सों पर करीब एक महीने तक लगातार पपीते का दूध लगाने से मस्से सूख जाते हैं।

29- भूनी फिटकरी और नीलाथोथा 10-10 ग्राम को पीसकर 80 ग्राम गाय के घी में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मस्सों पर लगायें। इससे मस्से सूखकर गिर जाते हैं।

30- कनेर की जड़ को ठंड़े पानी के साथ पीसकर शौच जाते समय जो मस्से बाहर निकल जाते है उन पर लगाने से वे मिट जाते हैं।

- Dr. KAILASH DWIVEDI

रविवार, 30 सितंबर 2012

माँ की गोद मिली है यारो , मुझको अब सो जाने दो

माँ की गोद मिली है यारो ,
मुझको अब सो जाने दो 
माँ ने सींचा था जिस तन को 
अपने तन के अमृत से 
उस तन को इस माँ के
चरणों में अर्पण हो जाने दो 
माँ की गोद मिली है यारो ,
मुझको अब सो जाने दो 
जन्म , दूध और आशिशो का 
मै कर्जदार सौ जन्मो तक 
जितना संभव था बस उतना 
मुझको कर्ज चुकाने दो 
पोंछ सको तो पोंछ देना कुछ 
आंसू भारत माँ की तक़दीर के 
कुछ पंजाब ,हिमाचल आसाम के 
कुछ मुंबई दिल्ली कश्मीर के 
तुम अधिकारों की लड़ो लड़ाई
मुझको बस फर्ज निभाने दो 

माँ की गोद मिली है यारो ,
मुझको अब सो जाने दो 
भूल जाओ अब चश्मा चरखा
दिन बीत गए हैं बातों के
बिगड़े तीनो बन्दर अब न
मानेगे बिन लातों के 

समय हो चुका अब बाजी
सर धड की लग जाने दो 
माँ की गोद मिली है यारो ,
मुझको अब सो जाने दो 
भारत माँ की गोद मिली है 
मुझको अब सो जाने दो

सोमवार, 4 जून 2012


रक्त दान !!काश ऐसा हो
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अभी कुछ ही दिनों की बात है ,मेरे एक मित्र  जो कि दिल्ली निवासी है ,के बड़े भाई साहेब का एक जटिल आपरेशन हुआ जिसके लिए काफी मात्र में ब्लड कि जरुरत थी जो काफी  कोशिशो के बाद पूरा तो हुआ पर मन में एक सवाल रह गया ,कि देश में कितने ही लोग इस लिए काल के गाल में समा जाते है क्योंकि  उन्हें वख्त रहते खून प्राप्त ही नहीं हो पाता कारण कोई भी हो सकता है ! लेकिन कुछ कारन ऐसे भी हैं जिन्हें दूर किया जा सकता है ,जैसा कि अक्सर देखने को मिलता है कि लोग अपने  रिश्तेदारो/ मित्रो को खून देना तो चाहते है पर अपनी आर्थिक यां पारिवारिक मज्बूरिओं के कारण जरुरत के समय रक्त दान हेतु उस हास्पिटल तक पहुच ही नहीं पाते (ऐसा मेरे साथ भी हुआ जब चाह कर भी किसी मित्र तक नहीं पहुच सका ) क्या इस समस्या  का कोई हल नहीं  ? शायद हल है ,आज तकनिकी युग है हर जगह नए नए तकनिकी प्रयोग हो रहे है ये तकनिकी का ही कमाल है की आज घर से  निकलते समय हम जेब में नगदी नहीं देखते  a t m जो है जेब में कही घर से दूर है खर्चा ख़तम हो गया है तो घर पर फोन घुमाया ,उधर खाते में पैसे आये इधर हमने निकलवा लिए ,वो भी घर से हजारो किलोमीटर दूर ,और भी ऐसी ही कई चीजे है जो कभी असंभव सी थी पर आज सामान्य सी बात है ,हम सभी जानते है की रक्त यानी खून किसी भी तरीके से बनाया नहीं जा सकता पर किसी भी ब्लड बैंक में आप एक यूनिट ब्लड दे कर बदले में अपनी जरुरत के ग्रुप का एक यूनिट ब्लड प्राप्त कर सकते है आसन सा काम है पर सोचिये आप घर से दूर अजनबियों में है आपको चार यां छह यूनिट ब्लड चाहिए आपके रिश्तेदार दूर है ब्लड तो देना चाहते है पर आप तक पहुचना संभव नहीं है हो सकता है जब तक कोई रिश्तेदार यां मित्र समय निकल कर पहुचे मरीज के नाम के साथ स्वर्गीय लग जाये ये तो थी समस्या
अब समाधान क्या ऐसा नहीं हो सकता की मै अपने व्यस्त समय से एक घंटा निकालू अपने शहर के ब्लड बैंक जाऊ अपना एक यूनिट ब्लड निकलवाऊ और देश भर में किसी भी शहर में बैठे अपने रिश्तेदार को अपना रक्त दान की स्लिप इ मेल करूँ और उन्हें वह स्लिप दिखने पर उस शहर में ब्लड बैंक से एक यूनिट ब्लड प्राप्त हो जाय कितना समय बचेगा ,कितना आवागमन में लगने वाला खर्चऔर सबसे बड़ी बात कितनी कीमती जाने बच जाएगी अगर यह परिकल्पना सच हो जाये तो शायद खून की कमी से मेरे देश में कोई जान न जाये ! कोशिश हो तो दोस्तों यह असंभव तो नहीं यदि धन प्राप्त करने के लिए यह तकनीक इस्तेमाल हो सकती है तो यहाँ क्यों नहीं आइये हम सब मिल कर अपने अपने स्तर से  कोशिश करें  दोस्तों कोशिशे ही तो कामयाब होती है

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

देवी तो नहीं है मेरी माँ


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देवी तो नहीं है मेरी माँ
कहूँगा भी नहीं
और न ही हो
सुना है रूठ जाती हैं देवियाँ
जरा जरा सी बात पर ,
पर माँ तो  नहीं रूठती
कभी नहीं
परी भी नहीं है मेरी माँ
नहीं देखा उनका देश
न रूप माँ की तरह
जो हमेंशा  है मेरे साथ
नहीं दूर  होती एक पल भी
कभी नहीं
हाँ सोचता हूँ कभी -कभी
कह दूँ भगवान का रूप
पर नहीं ,उसे भी तो नहीं देखा
किसी भी रूप में
हाँ मगर वो कहीं होगा तो
शायद माँ के ही रूप में
जब चला हूँ पथरीली राह
यां नंगे पाँव तपती दोपहर में
पाई है माँ की हथेलिया हमेशा
अपने पैरो व् उस जमीन के बीच
बचपन से सुनता आया हूँ
माँ देवी का रूप है ,
माँ परी है भागवान  की छाया है ,लेकिन
सब कुछ है इसके उलट
हाँ देविया हो सकती है माँ का एक रूप
भागवान भी होगा तो माँ की छाया सा ही
क्योंकि छाया तो अक्सर अँधेरे में
छोड़ देती है तनहा -अकेला
माँ नहीं कही भी नहीं
कभी नहीं
क्योकि देवी तो नहीं है मेरी माँ
जो रूठ जायेगी